प्राकृतिक चिकित्सा

प्रत्येक मनुष्य के जीवन में इन तीन बातों की अत्यधिक आवश्यकता होती है – स्वस्थ जीवन, सुखी जीवन तथा सम्मानित जीवन। सुख का आधार स्वास्थ्य है तथा सुखी जीवन ही सम्मान के योग्य है।

उचित आहार

इस संसार में सुखी जीवन की इच्छा रखने वाले बुद्धिमान व्यक्ति आहार-विहार, आचार और चेष्टाएँ हितकारक रखने का प्रयत्न करें।

स्वास्थ्य का सच्चा मार्ग

स्वास्थ्य का मूल आधार संयम है।

सुखमय जीवन की कुंजि

खुशी जैसी खुराक नहीं और चिंता जैसा गम नहीं।

Achyutaya HariOm Panchamrit Ras :अच्युताय हरिओम पंचामृत रस : स्वास्थय व ऊर्जा प्रदायक, पाचक, व रोगनाशक अदभुत योग

Achyutaya HariOm Santkripa Surma : अच्युताय हरिओम संतकृपा सुरमा - आँखों को सुरक्षित, निरोगी, तेजस्वी बनाने की क्षमता रखने वाला अदभुत योग

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Monday, 15 January 2018

पंचामृत रस : स्वास्थय व ऊर्जा प्रदायक, पाचक, व रोगनाशक अदभुत योग | Panchamrit Ras


Achyutaya HariOm Panchamrit Ras : सम्पूर्ण परिवार का सुरक्षा कवच

पंचामृत रस संतो द्वारा अनुभूत, स्वास्थय व ऊर्जा प्रदायक, पाचक, व रोगनाशक अदभुत योग है ।

अच्युताय हरिओम पंचामृत रस के फायदे : Achyutaya HariOm Panchamrit Ras ke Fayde

१. पंचामृत रस भूख को बढाने वाला, रूचिकर, भोजन पचाने में सहायक, कृमिनाशक एवं हृदय के लिए हितकर अनुभूत रामबाण योग है ।

२. पंचामृत रस के नियमित सेवन से पाचनशक्ति सबल होकर शरीर स्वस्थ, मजबूत व ऊर्जावान बनता है ।

३. पंचामृत रस के सेवन से चेहरे में निखार आता है । रोगप्रतिकारक शक्ति बढती है ।

४. पंचामृत रस थकान को दूर करनेवाला तथा प्रसन्नता एवं स्फूर्ति बढ़ाने वाला है ।

५. पंचामृत रस रक्त को सुद्ध कर त्वचा की कांति बढाने में भी सहायक है ।

६. आज की आधुनिक जीवनशैली, शारीरिक श्रम का अभाव एवं मिठाई, चॉकलेट आदि चीनी से बनी चीजों व वसा, नमक आदि के अधिक उपयोग के कारण मोटापा, मधुमेह (Diabetes), कैंसर (Cancer), हृदय की रक्तवाहिनियों का अवरोध (Coronary Artery Disease), उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure), रक्त में वसा (Cholesterol) का बढना आदि विभिन्न प्रकार के रोग उत्पन्न होते है । पंचामृत रस इन सभी बीमारियों में बहुत अधिक लाभदायी है ।

७. पंचामृत रस जीर्ण कोशिकाओं को पुनः नवजीवन देता है । स्वस्थ व्यक्ति यदि इसका सेवन करता रहे तो निरोगी रहने में मदद मिलती है, उसकी रोगप्रतिकारक क्षमता पुष्ट होगी अतः इसे रसायन कहा जाता है । इसके सेवन से रक्तवाहिनियों की कार्यक्षमता बनी रहती है, जिससे वृद्धावस्था के लक्षण देरी से प्रकट होते है ।

८. पंचामृत रस आमाशय, मस्तिष्क व हृदय को बल देता है । यकृत की क्रिया को व्यवस्थित करने वाला है ।

९. पंचामृत रस का सेवन उल्टी (Vomit), जी मिचलाना (Nausea), अफारा (Gas), कब्ज (Constipation) आदि पाचन सम्बंधित तकलीफों में लाभदायी है ।

१०. पंचामृत रस में पाये जाने वाले घटक द्रव्यों के कैंसर रोधक विशेष गुण है, जिसके कारण यह कैंसर से रक्षा करने में सहायक है ।

११. इसकी अल्प मात्रा शरीर को कई रोगों से छुटकारा दिलाती है । यह रक्त में वसा (Cholesterol) को कम करके हृदय एवं रक्तवाहिनियों से सम्बंधित रोगों से रक्षा करने में सहायक है ।

१२. पंचामृत रस में पाये जाने वाले एंटी हिस्टामिन के कारण यह एलर्जी के कारण होने वाले सर्दी-जुकाम, छींक आना आदि प्रतिक्रिया का शमन करती है ।

सेवन विधि :- २ चम्मच (१० मि.ली.) से ३ चम्मच (१५ मि.ली.) शहद या पानी के साथ दिन में एक-दो बार ले सकते है अथवा वैद्यकीय सलाहनुसार लें । उपयोग करने से पहले बोतल को अच्छी तरह हिला लें ।

सावधानी : पंचामृत रस लेने के बाद १ घंटे तक दूध ना लें, शुक्रवार एवं रविवार को न ले ।

Wednesday, 6 December 2017

अच्युताय हरिओम संतकृपा सुरमा



★   पैत्तिक विकारों में शीतवीर्य द्रव्यों का एंव कफज विकारों में उष्णवीर्य वाले लेखन द्रव्यों का प्रयोग करना होता है । पंरतु गुरूकृपा से बना ये संतकृपा सूरमा अपने आप में अद्भुत है जो एक साथ पित्त कफ के दोषों का निवारण कर आँखों के विविध रोगों को दूर करके आँखों की दृष्टि को निर्मल सुरक्षित व पुष्ट करता है |

★   इस आधुनिक युग के विविध हानिकारक साधनों जैसे कि कम्प्यूटर, टेलीविजन, मोबाइल, लेपटॉप, एल.ई.डी., चमकदार रोशनी, आँख के श्रृंगार प्रसाधन साथ ही दैनिक आहार-विहार जिसमें फास्ट-फूड, जंग-फूड, बजारू मिर्च मसालेदार भोजन, रात्रि जागरण, चिंता, शोक, क्लेश, क्रोध के कारण आँखो को क्षति होती है |

★   इस रफ्तार से भागते तेज युग में त्वरित लाभ हो आँखों का तेज बरकरार रहे इसी ध्येय से जन समाज की पीडा को स्वयं की पीडा अनुभव करने वाले परम दयालु बापूजी ने इस सूरमे में ऐसी पुष्टिकारक औषधि डलवाई है जिससे लोगों की पीडा दूर हो ।

सुरमा की प्रमुक औषधियाँ व उनके फायदे :

मोती पिष्टी :- वातवाहिनी, रक्तवाहिनी, मासँपेशियो को सबल बनाते हुए नेत्र कोे हानि करने वाले दोषों को हर लेता है ।
प्रवाल पिष्टी :- आँख में बढी तीक्ष्णता, अम्लता, उष्णता को हर कर स्थानीय नाडीयो को बल देता है ।
शुद्ध तुतीया :- कई दिनों तक शास्त्रानुसार परिशुद्ध किया ये दृव्य, मासँ वृद्धि बेल दूषित बाहरी संक्रमण को अपने प्रभावी गुणों से नष्ट करता हैं ।
काली मिर्च :- आँखों को खराब करने वाले पित्त कफ का नाश करता है ।
चमेली की कली :- अपने तिक्त कषाय गुण से दोषों का हरण ।
नीम की कोपल :- अपने विषाणुहर व तिक्त गुण से आँखों का इन्फेकशन व दुषित कफ पित्त का शमन करती  है इसी प्रकार से अन्य औषधि भी डाली गई है |

इस प्रकार संतकृपा सुरमा सचमुच में नाम के अनुसार अपने में आँखों को सुरक्षित निरोगी तेजस्वी बनाने की क्षमता रखता है ।

पथ्य :- ऑवला का किसी भी रुप में सेवन, काली किशमीश, गाय का दूध, घृत, मूंग के छिलके वाली दाल ।
अपथ्य :- बाजारू जंग, फास्ट-फूड, दही ।
पालनीय :- रोजाना प्रातः मुखधावन के बाद मुहँ मे ठंडा पानी का कुल्ला भरकर छोटी कटोरी (एूश ुरीहशी) में भी ठंडा पानी लेकर आँख को उसमें डुबाकर आँख पटपटाना, घुमाना ये प्रकिया दोनों आँखों में दो बार करनी है हर बार मुख का पानी भी बदलना यह विशेष लाभ के लिए है ।

उपयोग-विधि : सुरमे का उपयोग करने से पहले सलाई को पूरी तरह स्वच्छ व सूखे कप‹डे से साफ करें । सुरमे का कम-से-कम मात्रा में उपयोग करें । रात को सोते समय इसका एक बार उपयोग करें ।

सावधानियाँ : ११ साल से कम उम्र के बच्चों को सुरमा न लगायें । किसी भी प्रकार के आँखों के ऑपरेशन या लेंस के उपयोग के बाद सुरमे का प्रयोग न करें । इसे साफ और सूखी जगह पर ही रखें ।

नेत्र दीर्घकाल स्वस्थ व सुंदर चमकें तुम्हारे ।

प्राप्ति-स्थान : सभी संत श्री आशारामजी आश्रमों( Sant Shri Asaram Bapu Ji  Ashram ) व श्री योग वेदांत सेवा समितियों के सेवाकेंद्र से इसे प्राप्त किया जा सकता है |

Thursday, 20 July 2017

शहद का जमना एक कुदरती प्रक्रिया - चरकसंहिता



हजारो वर्षपूर्व रचित चरकसंहिता मे भी शहद जमने की बात का प्रमाण दिया गया है ।

चरकसंहितामे , 27  अध्याय "अन्नपानविधी (श्लोक 242 ) " मे मधुशर्करा का स्पष्ट वर्णन है ।

"रुक्षा वम्यतिसारघ्नि च्छेदनी मधुशर्करा । तृष्णासृक् पित्तदाहेषु प्रशस्ता: सर्वशर्करा: ।। "

अनुवाद : शहद से निर्मित चीनी रुक्ष, उल्टी को रोकनेवाली, दस्तको रोकनेवाली, कफ को तोड़नेवाली, तृषा का समन करनेवाली, रक्तपित्त ओर दाह (जलन)को मिटानेवाली है ।

वर्तमान समय मे विदेशी बाजारों मे honey sugar (शहद से निर्मित चीनी ) के नामसे बेची जानेवाली सबसे महंगी चीनी, चरकसंहिता मे बताई गई मधुशर्करा ही है ।

          भारतीय समाज मे यह मान्यता ज्यादा देखने को मिलती है के शहदका जमना उसमे मिलावट की निशानी है । लेकिन यह पूर्णतः गहत धारणा है ।

           शहद का जमना एक कुदरती प्रक्रिया है । शुद्ध शहद भी जाम ( crystallized ) हो सकता है । शहद का जमना इस बात पर निर्भर करता है की शहद को स्त्रोत क्या है ? मतलब कोनसे फूलो के रससे मधुमक्खीओने शहद का निर्माण किया है । शहद के अंदर प्राकृतिक रूप मे ग्लूकोज़ ओर फ्रुक्टोज जेसी शर्कराए होती है । शहद का जमना उसके अंदर रहे हुए ग्लूकोस की मात्रा पर निर्भर करता है । जिन फूलोके रस मे प्राकृतिक रूप से ग्लूकोज़ की मात्रा अधिक होती है, उनके रस ( nectar)  से अगर मधुमक्खी शहद का निर्माण करती है तो उस शहदमे जमनेका गुणधर्म ज्यादा रहेगा । प्राकृतिक रूप से  तैलीबीज (oil seeds) वाली वनस्पति के फूलो से अगर मधुमक्खी शहद बनती है तो उसके जमनेका गुण अधिक होता है । इसीलिए मधुमक्खी पालन मे बक्से ( honey bee hives )को राइ, सूर्यमुखी, तिल, सोयाबीन जेसे खेतो के बीच रखते है तो उनसे मिला शहद जमता है । उसे जाम हनी या क्रीम हनी के नाम से निर्यात किया जाता है, जो संपूर्णतः जमा हुआ होता है ।

                ज्यादातर लोगो मे जमे हुए शहद को लेकर गलत धारणाये होती है । इस कारण से भारत मे हरकही raw honey के स्थान पर processed या heated शहद ही बिकता है, जो सामान्य रूपसे  जमता नही है । शहद को एकबार उबाल देने से उसमे रहा जमने का (crystalised ) होने का स्वाभाविक गुण नष्ट हो जाता है । लेकिन उसके साथ ही शहदमे रहे औषधीय गुण भी नष्ट हो जाते है ।  वास्तविकता यह हे की 45° c तापमान पर भी
शहद में रहे औषधीय तत्व जेसे की antioxidant, enzymes, vitamins, many anti aging properties, acids etc, नष्ट हो जाते हे । यह औषधीय तत्व ही शारीर को आरोग्यप्रदान करते हे और कही रोगों से लड़ने की शक्ति देते हे । इसलिए शहद को गर्मी से दूर रखना चाहिए । जब की ज्यादातर कंपनीया शहद को प्रोसेस्ड या पेस्च्युराइस ( हीटिंग और कूलिंग प्रोसेस ) करके बेचती हे, और ऐसा शहद शुगर सिरप से बढ़कर कुछ नहीं हे । इसीलिए ज्यादातर आयुर्वेद चिकित्सक "Raw honey" का उपयोग करने की सलाह देते हे ।
   
           शुद्ध शहद का जमना एक कुदरती प्रक्रिया है । वास्तव मे शहद के औषधीय गुण घन अवस्था (crystallized form) मे प्रवाही अवस्थासे  ज्यादा सुरक्षित होते है । इसलिए जमे हुए शहद का उसी अवस्था मे उपयोग करे ।






प्राप्ति-स्थान : सभी संत श्री आशारामजी आश्रमों व श्री योग वेदांत सेवा समितियों के सेवाकेंद्र से इसे प्राप्त किया जा सकता है |

Saturday, 23 January 2016

अच्युताय एप्पल जैम - Achyutaya Apple Jam

अच्युताय एप्पल जैम - Achyutaya Apple Jam



सेब जैम में प्रचुर मात्रा में जीवनीय तत्त्व एवं खनिज पाये जाते है।

सेब जैम हृदय, मस्तिष्क एवं आँतों को बल देता है।

सेब जैम से कोलेस्ट्राल कम होता है और हार्ट-अटैक से रक्षा होती है।

सेब जैम आँतें, फेफड़े एवं पौरुषग्रंथि के कैंसर से रक्षा करता है।


सेब जैम से स्मृतिशक्ति बनी रहती है। लौह तत्त्व बढ़कर खुन की कमी दूर होती है।


सेब जैम मोटापा कम होता है और अति दुर्बल रोगियों का बल बढ़ता है।




 

अच्युताय अश्वगंधा टेबलेट - Achyutaya Ashwagandha Tablet

अच्युताय अश्वगंधा टेबलेट 
बलवर्धक पुष्टिदायी दिव्य रसायन  
Achyutaya Ashwagandha Tablet



अश्वगंधा टेबलेट एक बलवर्धक व पुष्टिदायक श्रेष्ठ रसायन है। यह मधुर व स्निग्ध होने के कारण वात शमन करने वाला एवं रस - रक्तादि सप्तधातुओं का पोषण करने वाला है।

अश्वगंधा टेबलेट से विशेषतः मांस व शुक्रधातु की वृद्धि होती है। यह शक्तिवर्धक, वीर्यवर्धक, स्नायु और मांसपेशियों को ताकत देनेवाला व कद बढ़ाने वाला एक पौष्टिक रसायन है।

अश्वगंधा टेबलेट धातु की कमजोरी, शारीरिक - मानसिक कमजोरी आदि में भी लाभदायी है।

अश्वगंधा टेबलेट बालकों के सर्वांगीण विकास के लिए वरदानस्वरुप है।

  





 

Wednesday, 20 January 2016

अच्युताय आंवला भृंगराज केश तेल - Achyutaya Amla Bhringraj Kesh Tel

अच्युताय आंवला भृंगराज केश तेल 
Achyutaya Amla Bhringraj Kesh Tel

बढिया ही नही सबसे अच्छा 



अच्युताय आँवला-भृंगराज केश तेल बालों के लिए उत्तम तेल है।

अच्युताय आँवला-भृंगराज केश तेल सिर पर लगाने से बाल बढ़ते है।

सिर का दर्द, बाल सफेद होना, गिरना जैसे रोग अच्छे होते है।

अच्युताय आँवला-भृंगराज केश तेल से मस्तिष्क की कमजोरी नष्ट होकर स्मरणशक्ति बढ़ती है।

सिर में रुसी नहीं होती है।


अच्युताय दन्त सुरक्षा तेल - Achyutaya Dant Suraksha Tel

अच्युताय दन्त सुरक्षा तेल - Achyutaya Dant Suraksha Tel

पायोरिया को दूर कर मसुडो को करे मजबूत 
 

अच्युताय दंत सुरक्षा तेल से पायरिया, मसूड़ों का दर्द तथा दाँतों की सभी तकलीफों में मसाज करने से बहुत लाभ होता है ।





Monday, 18 January 2016

अनानास - PINEAPPLE

 अनानास - PINEAPPLE
सबसे बेहतरीन स्वाद व पौष्टिकता से परिपूर्ण और उत्तम स्वास्थ्य हेतु 



<>   अनानास (पाइनएप्पल) औषधीय गुणों से भरपूर फल है। अनानास शरीर के भीतरी विषो को बाहर निकालता है। इसमें क्लोरीन की भरपूर मात्रा होती है। साथ ही पित्त विकारों में विशेष रुप से और पीलिया (पांडु) रोगों में लाभकारी है। ये गले एवं मूत्र रोगों में लाभदायक है। इसके अलावा ये हड्डीयों को मजबूत बनाता है।

<>    अनानास में प्रचुर मात्रा में मैग्नीशियम पाया जाता है। यह शरीर की हड्डीयों को मजबूत बनाने और शरीर को ऊर्जा प्रदान करने का काम करता है।

<>   अनानास रस के सेवन से दिन भर के लिए आवश्यक मैग्नीशियम की पूर्ति होती है। अनानास में पाया जाने वाला ब्रोमिलेन सर्दी और खाँसी, सूजन, गले में खराश और गठिया में लाभदायक होता है। यह पाचन में भी उपयोगी होता है।

<>    अनानास अपने गुणों के कारण नेत्र ज्योति के लिए भी उपयोगी होता है। दिन में तीन बार रस लेने से बढ़ती उम्र के साथ आँखों की रोशनी कम हो जाने का खतरा कम हो जाता है।  

<>    आस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों के शोधों के अनुसार यह कैंसर के खतरे को भी कम करता है। ये उच्च एंटीआक्सीडेंट का स्त्रोत है व इसमें विटामिन ‘सी’ प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और इससे सर्दी समेत कई अन्य संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।

<>    एक कप अनानास रस पीने से दिनभर के लिए जरूरी मैग्नीशियम के 73 प्रतिशत की पूर्ति होती है।

<>    आपके लिए सबसे बेहतरीन स्वाद व पौष्टिकता से परिपूर्ण और उत्तम स्वास्थ्य हेतु पाइनएप्पल ड्रिंक प्रस्तुत है।



 


Friday, 14 August 2015

शहद की बेहतरीन खूबियाँ और प्रयोग

>>>  शहद की बेहतरीन खूबियाँ और प्रयोग <<<


























<> अदरक का रस और शहद मिलाकर सेवन करने से खांसी-जुकाम में बहुत आराम मिलता है.

<> मुहांसों पर रात में सोते समय दालचीनी चूर्ण और शहद मिलाकर लगायें और सुबह धो लें, मुहांसे ठीक होंगे और दाग भी नहीं रहेंगे.

<> हलके गुनगुने पानी में शहद और नीम्बू का रस मिलाकर सुबह पीने से वजन कम होता है,कब्ज दूर होता है, साथ ही शरीर से विषैले तत्व बाहर निकल जाते है.

<> होठों पर शहद लगाने से होंठ नर्म,मुलायम होते हैं.

<> एक चम्मच लहसुन का रस और शहद मिलाकर दिन में दो बार सुबह शाम पीने से ब्लड प्रेशर काबू में रहता है .



Thursday, 13 August 2015

शरीर को पुनः नया बना देता है पुनर्नवा



>>> शरीर को पुनः नया बना देता है  पुनर्नवा <<<


























<> पुनर्नवा सुजन को नष्ट करती है यह ह्रदय रोग व किडनी के विकारों में (पथरी,किडनी फेल्युअर, किडनी की सुजन आदि) में विशेष लाभदायी है 

<> प्रोस्टेट ग्रंथि में वृद्धि होने पर पुनर्नवा की जड़ के चूर्ण का सेवन करें

<> संधिवात में पुनर्नवा के पत्तों की भाजी सोंठ डालकर खायें।

<> पैर की एड़ी में वेदना होती हो तो पुनर्नवा में सिद्ध किया हुआ तेल पैर की एड़ी पर लगाए एवं सेंक करें।

<> मोटापा दूर करने के लिए पुनर्नवा के 5 ग्राम चूर्ण में 10 ग्राम शहद मिलाकर सुबह-शाम लें। पुनर्नवा की सब्जी बना कर खायें।

<> पेट के रोगः गोमूत्र एवं पुनर्नवा का रस समान मात्रा में मिलाकर पियें।