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Friday, 15 February 2013

शिव स्वरोदय(भाग-13)


शिव स्वरोदय(भाग-13)



मासादौ चैव पक्षादौ वासरादौ यथाक्रमम्।
क्षयकालं परीक्षेत वायुचारवशात् सुधीः।।326।।
भावार्थ सुधी लोगों को क्रम से प्रत्येक माह, पक्ष, दिन के प्रारंभ में (सूर्योदय के समय) और मृत्यु के समय तत्त्व की परीक्षा करनी चाहिए। इसे समय-ज्ञान कहा गया है।
पञ्चभूतात्मकं दीपं शिवस्नेहेन सिञ्चितम्।
रक्षयेत्सूर्यवातेन प्राणी जीवः स्थिरो भवेत्।।327।।
भावार्थ इस भौतिक शरीर की रचना पंचमहाभूतों से होती है और वह शिवरूपी प्राण से सिंचित होता है। सूर्य-नाड़ी में प्राण का प्रवाह जीव की मृत्यु से रक्षा करता है, अर्थात् शक्ति प्रदान करता है। इसीलिए प्राण को इस पंचभूतात्मक शरीर में दीप कहा गया है।
मारुतं बन्धयित्वा तु सूर्य बन्धयते यदि।
अभ्यासाज्जीवते जीवः सूर्यकालेSपि वंचिते।।328।।
भावार्थ यदि सूर्यनाड़ी में प्राण को रोकने का अभ्यास किया जाय, तो पिंगला नाड़ी शक्तिशाली होती है और व्यक्ति को लम्बी आयु प्राप्त होती है।
गगनात्स्रवते चन्द्र कायपद्मं विकासयेत्।
 

कर्मयोगसदाभ्यासैरमरः शशिसंश्रयात्।।329।।
भावार्थ इस कर्मयोग के सदा अभ्यास करके शरीर में स्थित सहस्रार चक्र को विकसित करना चाहिए। क्योंकि इससे अमृत का स्राव होता है, जो व्यक्ति को अमर बना देता है।
शशाङ्कं वारयेद्रात्रौ दिवावायोर्दिवाकरः।
इत्यभ्यासरतो नित्यं स योगी नात्र संशयः।।330।।
भावार्थ जो व्यक्ति रात में चन्द्रनाड़ी के प्रवाह को और दिन में सूर्यनाड़ी के प्रवाह को नियमित रूप से रोकता है, वह निस्संदेह योगी होता है।
अहोरात्रं यदैकत्र वहते यस्य मारुतः।
तदा तस्य भवेन्मृत्यु सम्पूर्णे वत्सरत्रये।।331।।
भावार्थ यदि किसी का एक ही स्वर दिन-रात लगातार प्रवाहित होता रहे, तो समझ जाना चाहिए कि तीन वर्ष में उसकी मृत्यु होगी।
English Translation – If breath of a person flows through either of nostrils continuously day and night, it is understood that only three years of his life are left.
अहोरात्रद्वयं यस्य पिङ्गलायां सदा गतिः।
तस्य वर्षद्वयं प्रोक्तं जीवितं तत्त्ववेदिभिः।।332।।
भावार्थ यदि किसी की पिंगला नाड़ी (दाहिना स्वर) पूरी तरह दिन-रात लगातार प्रवाहित हो तो समझना चाहिए कि उसके जीवन के केवल दो वर्ष बचे हैं।
English Translation – If the breath of a person flows through right nostril continuously day and night, only two years of his life is left.
त्रिरात्रं वहते यस्य वायुरेकपुटे स्थितः।
तदा संवत्सरायुस्तं प्रवदन्ति मनीषिणः।।333।।
भावार्थ मनीषियों का मत है कि यदि किसी की एक ही नाड़ी से लगातार तीन रातों तक साँस चले तो समझना चाहिए कि उसका जीवन केवल एक वर्ष शेष रह गया है।
English Translation – According to the wise men if breath of a person flows through one nostril continuously for three nights, his life is left only for one year.
रात्रौ चन्द्रो दिवा सूर्यो वहेद्यस्य निरन्तरम्।
जानीयात्तस्य वै मृत्युः षट्मासाभ्यन्तरे भवेत्।।334।।
भावार्थ यदि किसी व्यक्ति का बाँया स्वर रात में तथा दाहिना स्वर दिन में लगातार प्रवाहित हो रहा हो, तो समझना चाहिए कि उसके जीवन के मात्र छः माह शेष बचे हैं।
English Translation – If the breath of a person flows through left nostril during the night and through right nostril during the day, only six months of his life are left.
लक्ष्यं लक्षति लक्षणेन सलिले भानुर्यदा दृश्यते
क्षीणो दक्षिणपश्चिमोत्तरपुरः षट्त्रिद्विमासैकतः।
मध्यं छिद्रमिदं भवेद्दशदिनं धूमाकुलं तद्दिने
सर्वैज्ञैरपि भाषितं मुनिवरैरायुः प्रमाणं स्फुटम्।।335।।
भावार्थ जल में सूर्य का प्रतिबिम्ब यदि किसी ओर से किसी को कटा-फटा दिखे, तो समझना चाहिए कि उसकी मृत्यु एक से छः माह के अन्दर होगी। यदि सूर्य के प्रतिबिम्ब के बीच में छिद्र दिखे, तो समझना चाहिए कि उसकी जिन्दगी मात्र दस दिन की है और यदि प्रतिबिम्ब धूमिल दिखायी दे, तो उसी दिन उसकी मृत्यु निश्चित है, ऐसा सर्वज्ञ समय-ज्ञानी ऋषियों का विचार है।
English Translation – If image of the sun appears broken to a person from any side, his death comes within six months. If he observes a hole in the middle of image, his life is left for ten days and if the image looks cloudy, he dies on the same day. Such observations have been made by saints.
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दूतः रक्तकषायकृष्णवसनो दन्तक्षतो मुण्डित-
स्तैलाभ्यक्तशरीर रज्जुकरो दीनोSश्रुपूर्णोत्तर।
भस्माङ्गारकपालपाशमुशली सूर्यास्तमायाति यः
कालीशून्यपदस्थितो गदयुतःकालानलस्यादृतः।।336।।
भावार्थ यदि दूत (प्रश्न करने वाला) लाल, कषाय (नारंगी) अथवा काले रंग के वस्त्र धारण किए हुए हो, दाँत टूटे हों, सिर का मुंडन कराये हो, शरीर में तेल पोते हुए हो अथवा उसके हाथ में रस्सी, राख, आग, नरमुंड, चिमटा हो तथा सूर्यास्त के समय खाली स्वर की दिशा से वह आए और उसी दिशा में बैठ जाय, तो समझना चाहिए कि वह साक्षात् यम है।
English Translation – A person in garment of red, ruddle or black colour, broken teeth, shaved head or with roap, ash, fire, skull or tongs in his hand, comes at sunset from the side of absent breath and sits on the same side. He should be considered as messenger of death.
अकस्मातच्चित्तविकृतिरकस्मात्पुरुषोत्तमः।
अकस्मादिन्द्रियोत्पातः सन्निपाताग्रलक्षणम्।।337।।
भावार्थ किसी रोगी में अचानक मनोविकार उत्पन्न हो जाए तथा थोड़ी ही देर में सुधार के लक्षण दिखने लगे और फिर अचानक प्रलाप करने लगे, तो इसे सन्निपात का लक्षण समझना चाहिए।
English Translation – If condition of a patient suddenly deteriorates and after some time sign of sudden recovery is observed or he utters meaninglessly, such symptoms are indication of delirium.
शरीरं शीतलं यस्य प्रकृतिर्विकृता भवेत्।
तदरिष्टं समासेन व्यासतस्तु निबोध मे।।338।।
भावार्थ उक्त अवस्था में उस व्यक्ति का शरीर शीतल होने लगे तथा उसकी अवस्था खराब होने लगे, तो उसका अनिष्ट समझना चाहिए। उसे मैं विस्तार पूर्वक बताता हूँ।
English Translation – If in the delirious state, patient’s body becomes cold and deterioration in the condition continues, this symptom indicates death. I (Lord Shiva) expatiate this further.
दुष्टशब्देषु रमतेSशुद्धशब्देषु चात्मनि।
पश्चात्तापो भवेद्यस्य तस्य मृत्युर्न संशयः।।339।।
भावार्थ यदि कोई व्यक्ति अपशब्द कहे और तुरन्त थोड़ी देर में अपने अपशब्द पर पश्चात्ताप करने लगे, तो निस्संदेह उसकी अचानक मृत्यु हो जाती है।
English Translation – If the patient at one moment abuses and immediately after some time repents for the same, his sudden death is inevitable.
हुंकारो शीतलो यस्य फुत्कारो वह्निसन्निभः।
महावैद्यो भवेद्यस्य तस्य मृत्युर्भवेद्ध्रुवम्।।340।।
भावार्थ जिस व्यक्ति की अन्दर जानेवाली श्वास शीतल हो और छोड़ी जानेवाली आग की भाँति गरम हो, उसे मृत्यु से बड़ा से बड़ा चिकित्सक भी नहीं बचा सकता।
English Translation – If the patient’s inspiration is cool and expiration is hot like fire, even a renowned physician cannot save his life.
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जिह्वां विष्णुपदं ध्रुवं सुरपदं सन्मातृमण्डलम्।
एतान्येवमरुन्धतीममृतगुं शुक्रं ध्रुवं वायेक्षणम्।
एतेष्वेकं स्फुटं न पुरुषः पश्येत्पुरः प्रेषितः।
सोSवश्यं विशतीह कालवदनं संवत्सरादुर्ध्वतः।।341।।
भावार्थ - जो व्यक्ति अपनी जीभ, आकाश, ध्रुवतारा, मातृमंडल, अरुन्धती, चन्द्रमा अथवा शुक्र तारा प्रयास करके भी न देख पाए, तो एक वर्ष के अन्दर उसकी मृत्यु निश्चित है।
English Translation – A person who cannot see his tongue, sky, pole star (evening star), Matrimandal (a group of divine star), Arundhati (a star near Saptarshimandal/plough), moon or morning star (Shukra) even after making good effort, he cannot survive more than one year.
अरश्मिबिम्बं सूर्यस्य वह्नेः शीतांशुमालिनः।
दृष्ट्वैकादशमासायुर्नरश्चोर्ध्वं न जीवति।।342।।
भावार्थयदि किसी व्यक्ति को सूर्य, चन्द्रमा अथवा अग्नि के प्रकाश न दिखाई दे, तो समझना चाहिए कि उसका जीवन ग्यारह माह से अधिक नहीं है।
English Translation – If someone cannot visualize light of the sun, moon or fire, his life is left only for eleven months.
वाप्यां पुरीषमूत्राणि सुवर्णं रजतं तथा।
प्रत्यक्षमथवा स्वप्ने दशमासान्न जीवति।।343।।
भावार्थयदि किसी व्यक्ति को जाग्रत अवस्था अथवा स्वप्न में बावड़ी या कुएँ में सोना, चाँदी, मूत्र या विष्ठा दिखाई दे, तो उसकी आयु दस माह से अधिक नहीं समझनी चाहिए।
English Translation – If gold, silver, stool or urine is seen by a person in a well or tank either in dream or awaken state, life of that person is left for ten months.
क्वचित्पश्यति यो दीपं सुवर्णं श्याममेव वा।
विरूपाणि च भूतानि नवमासान्न जीवति।।344।।
भावार्थयदि किसी को सोने अथवा काले रंग का दीपक दिखाई दे और वस्तुएँ अपने वास्तविक रूप में न दिखकर विकृत रूप में दिखाई पड़ें, तो समझना चाहिए कि उसका जीवन नौ माह से अधिक नहीं है।
English Translation – If a lamp of gold or black colour is seen by a person and the things are not seen by him in their natural shape, his life is not left for more than nine months.
स्थूलाङ्गोSपि कृशःकृशोSपि सहसा स्थूलत्वमालम्बते
प्राप्तो वा कनकप्रभो यदि भवत्क्रूरोSपि कृष्णच्छवि।
शूरो भीरुसुधीरधर्म निपुण शांतो विकारी पुमा-
नित्यैव प्रकृतिः प्रयाति चलनं मासाष्टकं जीवति।।345।।
भावार्थयदि किसी को मोटा व्यक्ति दुबला, दुबला मोटा, श्याम वर्ण का गौर, गौर वर्ण का श्याम, सज्जन व्यक्ति दुर्जन, वीर व्यक्ति कायर, शान्त व्यक्ति विकार से भरा दिखे, तो समझना चाहिए कि उसकी आयु केवल आठ माह शेष है।
English Translation – If a stout person appears like a lean and thin one, a person of dark complexion as fair, fair as dark, gentle man as cruel, brave as coward and a person of peaceful nature appears as unbalanced to someone, it should be understood that his life is left only for eight months.
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पीडाभवेत्पाणितले च जिह्वामूले यथास्याद्रुधिरं च कृष्णम्।
विद्धेन च ग्लायति यत्र दिष्ट्या जीवेन्मनुष्यः स हि सप्तमासम्।।346।।
भावार्थ जब किसी आदमी की हथेली अथवा जीभ के मूल में दर्द हो, उसके खून का रंग काला हो जाय एवं सूई चुभाने पर भी दर्द का अनुभव न हो, तो समझना चाहिए वह सात महीने तक जीवित रहेगा।
English Translation – When a person feels severe pain in the palm or root of the tongue, colour his blood becomes black and he does not feel pain on pricking a pin, then it should be understood that his life is left only for seven months.
मध्याङ्गुलीनां तित्रयं न वक्रं रोगं विना शुष्यति यस्य कण्ठः।
मुहुर्मुहुः प्रश्नवशेन जाड्यात् षड्भिः स मासैः प्रलयं प्रयाति।।347।।
भावार्थ जब बिना बीमारी के किसी आदमी की बीच की तीन उँगलियाँ न मुड़ें, गला सूखे तथा किसी विषय पर लगातार बोलने पर भी उसे याद न रहे, तो उसकी छः महीने में मृत्यु होती है।
English Translation – When, without any disease, it is not possible for a person to fold three fingers located in the middle, he gets his throat dry and fails to recollect even after speaking continuously for a long, his life is left for six months.
न यस्य स्मरणं किञ्चिद्विद्यते स्तनचर्माणि।
सोSवश्यं पञ्चमे मासे स्कन्धारूढो भविष्यति।।348।।
भावार्थ जब याददास्त के नष्ट होने और छाती (nipple) के चमड़े पर किसी प्रकार की अनुभूति न होने के लक्षण दिखाई दें, तो समझना चाहिए कि उस आदमी की मृत्यु पाँचवें महीने में होने की सम्भावना है।
English Translation – When symptoms of loss of memory and feelings of no pain on rubbing on nipples appear, he dies in the fifth month.
यस्य न स्फुरति ज्योतिः पीड्यते नयनद्वयम्।
मरणं तस्य निर्दिष्टं चतुर्थे मासे निश्चितम्।।349।।
भावार्थ जब किसी आदमी को दिखाई न दे और उसकी आँखों में दर्द हो, तो उसकी मृत्यु चौथे महीने में निश्चित है।
English Translation – If a person loses his vision and feels pain in his eyes, his death is inevitable in the fourth month.
दन्ताश्च वृषणौ यस्य न किञ्चिदपि पीड्यन्ते।
तृतीयमासतोSवश्यं कालाज्ञायां भवेन्नरः।।350।।
भावार्थ जब किसी आदमी के दाँत सुन्न हो जाएँ और अण्डकोषों को दबाने पर दर्द का अनुभव न हो, तो तीसरे महीने में उसकी मृत्यु अवश्य होती है।
English Translation – When teeth of a person lose sense and there is no feeling of pain in his testicles on applying pressure, his death takes place in the third month.
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