Tuesday, 19 February 2013

त्रिकाल संध्या के चमत्कारिक लाभ



त्रिकाल संध्या के चमत्कारिक लाभ

रात्रि में अनजाने में हुए पाप सुबह की संध्या से दूर होते हैं। सुबह से दोपहर तक के दोष दोपहर की संध्या से और दोपहर के बाद अनजाने में हुए पाप शाम की संध्या करने से नष्ट हो जाते हैं तथा अंतःकरण पवित्र होने लगता है।

अदभुत लाभ

आजकल लोग संध्या करना भूल गये हैं इसलिए जीवन में तमस् बढ़ गया है। प्राणायाम से जीवनशक्ति, बौद्धिक शक्ति और स्मरणशक्ति का विकास होता है। संध्या के समय हमारी सब नाड़ियों का मूल आधार जो सुषुम्ना नाड़ी है, उसका  द्वार खुला हुआ होता है। इससे जीवनशक्ति, कुंडलिनी शक्ति के जागरण में सहयोग मिलता है। वैसे तो ध्यान-भजन कभी भी करो, पुण्यादायी होता है किंतु संध्या के समय उसका प्रभाव और भी बढ़ जाता है। त्रिकाल संध्या करने से विद्यार्थी भी बड़े तेजस्वी होते हैं। अतएव जीवन के सर्वांगीण विकास के लिए मनुष्यमात्र को त्रिकाल संध्या का सहारा लेकर अपना नैतिक, सामाजिक तथा आध्यात्मिक उत्थान करना चाहिए।

कब करें ?

प्रातःकाल सूर्योदय से दस मिनट पहले और दस मिनट बाद में, दोपहर को बारह बजे के दस मिनट पहले और बाद में तथा सायंकाल को सूर्यास्त के दस मिनट पहले और बाद में – यह समय संधि का होता है। प्राचीन ऋषि-मुनि त्रिकाल संध्या करते थे। भगवान श्रीरामजी  उनके गुरुदेव वसिष्ठजी भी त्रिकाल संध्या करते थे। भगवान राम संध्या करने के बाद ही भोजन करते थे।

कैसे करें ?

संध्या के समय हाथ पैर धोकर, तीन चुल्लू पानी पीकर फिर संध्या में बैठें और प्राणायाम करें, जप करें, ध्यान करें तो बहुत अच्छा। अगर कोई ऑफिस या कहीं और जगह हो तो वहीं मानसिक रूप से कर ले तो भी ठीक है।




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