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Tuesday, 19 February 2013

सूर्य को अर्घ्य दान क्यों ?



सूर्य को अर्घ्य दान क्यों ?

भगवान सूर्य को जल करते हैं तो जल की धारा को पार करती हुई सूर्य की सप्तरंगी किरणें हमारे सिर से पैर तक पड़ती हैं, जो शरीर के सभी भागों को प्रभावित करती हैं। इससे हमें स्वतः ही ʹसूर्यकिरणयुक्त जल-चिकित्साʹ का लाभ मिलता है और बौद्धिक शक्ति में चमत्कारिक लाभ के साथ नेत्रज्योति, ओज-तेज, निर्णयशक्ति एवं पाचनशक्ति में वृद्धि पायी जाती है व शरीर स्वस्थ रहता है। अर्घ्य जल को पार करके आने  वाली सूर्यकिरणें शक्ति व सौंदर्य प्रदायक भी हैं। सूर्य प्रकाश के हरे, बैंगनी और अल्ट्रावायलेट भाग में जीवाणुओं को नष्ट करने की विशेष शक्ति है।
अर्घ्य देने के बाद नाभि व भ्रूमध्य (भौहों के बीच) पर सूर्यकिरणों का आवाहन करने से क्रमशः मणिपुर व आज्ञाचक्रों का विकास होता है। इससे बुद्धि कुशाग्र होती है। अतः हम सबको प्रतिदिन सूर्योदय के समय सूर्य को ताँबे के लोटे से अर्घ्य देना चाहिए। अर्घ्य देते समय इस ʹसूर्य गायत्री मंत्रʹ का उच्चारण करना चाहिएः
आदित्याय विद्महे भास्कराय धीमहि। तन्नो भानुः प्रचोदयात्।




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