Wednesday, 20 February 2013

प्लाट के लिए जमीन का चयन करने के लिए वास्तु टिप्स



प्लाट के लिए जमीन का चयन करने के लिए वास्तु टिप्स


प्लाट के लिए जमीन का चयन करने के लिए वास्तु टिप्स :
मकान निर्माण के लिए वास्तु अनुसार शुभ भूमि का चयन करते समय निम्नलिखित बाते मुख्तया ध्यान रखने वाली हें :
  • प्लाट के चारो कॉर्नर समकोण पर हो अर्थात प्लाट का आकार आयताकार या वर्गाकार हो. यदि प्लाट उत्तर-पूर्व दिशा में बढ़ा हुआ हो तो भी ठीक है पर दक्षिण-पशिम और दक्षिण-पूर्व में बढ़ा हुआ भूखंड उपयुक्त नहीं होता हें.
  • दो बड़े प्लाट की बीच स्थित एक अपेक्षाकृत छोटा प्लाट आर्थिक समृद्धि के लिए उपयुक्त नहीं होता हें.
  • प्लाट के पूर्व, उत्तर एवं उत्तर पूर्व दिशा में कोई बड़ा या भारी निर्माण नहीं होना चाहिए.
  • यदि प्लाट के उतर-पूर्व मे कोई पानी का स्थान हें तो यह शुभ होगा पर दक्षिण-पशिम दिशा मे पानी का स्थान कदापि नहीं होना चाहिए.
  • प्लाट समतल होना चाहिए, यही प्लाट समतल नहीं हे पर ढलान उत्तर या पूर्व दिशा की और होना चाहिए. दक्षिण या पशिम दिशा की और का ढलान नहीं होना चाहिए.
  • प्लाट टी (T) पॉइंट पर नहीं होना चाहिए यानि प्लाट के किसी भी दिवार पर पर आकार कोई रास्ता बंद नहीं हो जाना चाहिए.
  • प्लाट मंदिर, मकबरा, शमशान के सामने नहीं होना चाहिए एवं उस पर मंदिर अथवा पीपल के पेड की छाया पड़नी चाहिए.
प्लाट की दिशाये:
  • पूर्वमुखी प्लाट (East Facing Plot) : पूर्व को देखता हुआ प्लाट शिक्षा, धर्म एवं अध्यात्म के कार्य मे लगे व्यक्तियो के लिए उपयुक्त होता हें.
  • पश्चिम मुखी प्लाट (West Facing Plot) : पश्चिम को देखता हुआ प्लाट समाज को सर्विस प्रदान करने वालों लोगो जैसे की डाक्टर के लिए उपयुक्त होता हें.
  • उत्तर मुखी प्लाट (North Facing Plot) : उत्तर को देखता हुआ प्लाट, सरकारी सेवा, पुलिस, सेना मे कम करने वालो के लिए उत्तम होता हें. यह अधिकारों में वृद्धि के लिए अच्छा हें.
  • दक्षिण मुखी (South Facing Plot) : दक्षिण को देखता हुआ प्लाट व्यापारियों एवं व्यापारिक संस्थानों में कार्य करने के लिए उपयुक्त होता हें.



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