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Thursday, 21 February 2013

अधिकांश टूथपेस्टों में पाया जाने वाला फ्लोराइड कैंसर को आमंत्रण देता है.......



अधिकांश टूथपेस्टों में पाया जाने वाला फ्लोराइड कैंसर को आमंत्रण देता है.......

आजकल बाजार में बिकने वाले अधिकांश टूथपेस्टों में फलोराइड नामक रसायन का प्रयोग किया जाता है। यह रसायन शीशे तथा आरसेनिक जैसा विषैला होता है। इसकी थोड़ी-सी मात्रा भी यदि पेट में पहुँच जाए तो कैंसर जैसे रोग पैदा हो सकते हैं।

अमेरिका के खाद्य एवं स्वास्थ्य विभाग ने फ्लोराइड का दवाओं में प्रयोग प्रतिबंधित किया है। फ्लोराइड से होने वाली हानियों से संबंधित कई मामले अदालत तक भी पहुँचे हैं। इसेक्स (इंग्लैण्ड) के 10 वर्षीय बालक के माता-पिता को कोलगेट पामोलिव कंपनी द्वारा 264 डॉलर का भुगतान किया गया क्योंकि उनके पुत्र को कोलगेट के प्रयोग से फ्लोरोसिस नामक दाँतों की बीमारी लग गयी थी।

अमेरिका के नेशनल कैंसर इन्स्टीच्यूट के प्रमुख रसायनशास्त्री द्वारा किये गये एक शोध के अनुसार अमेरिका में प्रतिवर्ष 10 हजार से भी ज़्यादा लोग फ्लोराइड से उत्पन्न कैंसर के कारण मृत्यु को प्राप्त होते हैं।

टूथपेस्टों में फ्लोराइड की उपस्थिति चिंताजनक है, क्योंकि यह मसूड़ों के अंदर चला जाता है तथा अनेक खतरनाक रोग पैदा करता है। छोटे बच्चे तो टूथपेस्ट को निगल भी लेते हैं। फलतः उनके लिए तो यह अत्यंत घातक हो जाता है। टूथपेस्ट बनाने में पशुओं की हड्डी के चूरे का प्रयोग किया जाता है।


हमारे पूर्वज प्राचीन समय से ही नीम तथा बबूल की दातुन का उपयोग करते रहे हैं। दातुन करने से अपने-आप मुँह में लार बनती है जो भोजन को पचाने में सहायक है एवं आरोग्य की रक्षा करती है।





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