Friday, 29 March 2013

स्वास्थ्य-प्रदायक नीम

स्वास्थ्य-प्रदायक नीम







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निम्बती-स्वास्थ्य ददाति' अर्थात जो निरोग कर दे, स्वास्थ्य प्रदान करे वह है 'नीम'| नीम वृक्ष के पंचांग - पत्ते, फूल, फल, चल एवं जड यानी सम्पूर्ण वृक्ष हि औषधीय गुणों से भरपूर है| नीम की छाया भी स्वास्थ्यप्रद है| अत: इसकी छाया व हवा में विश्राम करना श्रेयस्कर है| नीम ठंडा, कडवा, कसैला, पित्त व कफशामक परन्तु वातवर्धक है|

नीम के पत्ते : उत्तम जीवाणुनाशक व रोग्प्र्तिकार्क शक्ति को ब्दानेवाले हैं| नीम की कोंपले चबाने से रक्त की शुद्धि होती है| पत्तियों का १-१ बूंद रस आँखों में डालने से आँखों को ठंडक व आराम मिलता है तथा मोतियाबिंद से आँखों की रक्षा होती है| रस में मिश्री मिलाकर पिने से शरीर की गर्मी शांत हो जाति है| चुटकी भर पिसा हुआ जीरा, पुदीना और काला नमक मिलाकर पिने से अम्लपित्त (एसिडिटी) में राहत मिलती है| यह शरबत हृदय को बल व ठंडक पहुंचता है| उच्च रक्तचाप में एक सप्ताह तक रोज सुबह रस पिए, फिर २ दिन छोडकर १ सप्ताह लगातार पिने से लाभ होता है| नीम के रस में २ ग्राम रसायन चूर्ण मिलाकर पीना स्वप्नदोष में लाभदायी है|
नीम की पत्तियों का रस शहद के साथ देने से पीलिया, पांडुरोग व रक्तपित्त ( नमक, योनि, मूत्र आदि द्वारा रक्तस्राव होना) में आराम मिलता है|
फिरंग (सिफिलिस) व सुजाक (गोनोरिया) में भी पत्तियों का रस विशेष लाभदायी है| विषैला पदार्थ पेट में चला गया हो तो नीम का रस पिलाकर उलटी करने से आराम मिलता है| नीम रक्त व त्वचा की शुद्धि करता है| अत: दाद, खाज, खुजली आदि त्व्चारोगों में नीम के पंचांगों का कदा अथवा रस पिलायें तथा नीम का तेल लगायें| पत्तियां दही में पीसकर लगाने से दाद जड से नष्ट हो जाति है|
बहूमुत्रता (बार-बार पेशाब होना) में भी नीम के रस में आधा चम्मच हल्दी का चूर्ण मिलाकर पीना लाभदायी है|
नीम दह्शाम्क है| बुखार में होनेवाली जलन अथवा हाथ-पैरों की जलन में नीम की पत्तियां पीसकर लगाने से ठंडक मिलती है|
नीम की पत्तियों के रस में शहद मिलाकर पिअने से पेट के कृमि नष्ट होते हैं|
चेचक में नीम की पत्तियों का रस शरीर पर मलें| रस को गुनगुना करके सुबह-दोपहर-शाम पिलायें| बिस्तर पर पत्तियां बीचा दें तथा दरवाजे और खिडकियों पर भी बाँध दें|
सभी प्रयोगों में रस की मात्रा : २० से ३० मि.ली.

नीम की अंतर छाल (अंदर की छाल) : ३ ग्राम पीसी हुई छाल व ५ ग्राम पुराना गुड मिलाकर खाने से बवासीर में आराम मिलता है| इससे ज्वर भी शांत हो जाता है| छाल पीसकर सिर पर लगाने से नकसीर बंद हो जाति है|
नीम के फुल : ताजे फूलों का २० मि.ली. रस पीनेसे फोड़े-फुंसियाँ मिट जाती है| चैत्र महीने (१ मार्च से ६ अप्रैल तक) में १५ दिन तक सुबह फूलों का रस पियें| इन दिनों बिना नमक का भोजन करें, खट्टे, तीखे व तरल हुए पदार्थ न खाएं| इससे सभी प्रकार के त्वचा-विकारों में लाभ होता है और रोग्प्र्तिकार्क शक्ति भी बढती है|

निबैली (नीम का फल) : अप्रैल-मई में जब ताजे फल लग जाते हैं तब पकी हुई १० निबोलियाँ रोज खाएं| इससे रक्त की शुद्धि होती है तथा भूख भी खुलकर लगती है| निबोली की चटनी भी स्वादिष्ट व स्वास्थ्यवर्धक है| यह अर्श (बवासीर) नाशक है|

नीम की टहनी : अंगुल मोती व ८-१० इंच लम्बी सीधी टहनी तोडकर उसके अग्रभाग को दांतों से चबाकर दातुन बनायेंउससे दातुन करने से दन्त स्वच्छ, चमकीले व मजबूत बनते हैं तथा मसूड़े व दांतों के रोग नही होते| मुंह के कैंसर की तेजी से बढती हुई समस्या को यह प्रयोग नियंत्रित कर सकता है| यह दांत के कृमियों को नष्ट करता है|

बाहृय प्रयोग: नीम की छाल का कदा बनाकर उससे घाव धोने से वह जल्दी भर जाता है|
पुराने घाव तथा मधुमेहजन्य घाव (Diabetic ulcers), चर्मरोग, पैरों के तलुए की जलन आदि समस्याओं में नीम लगाने से लाभ होता है| दांतों की सदन में नीम के पंचांग कड़े से कुल्ले करने से राहत मिलती है|
नीम के पेड़ के नीचे पड़े हुए सूखे पत्ते शाखाओं का धुंआ करने से वायुमंडल शुद्ध और स्वच्छ रहता है|


Means that which imparts health & eradicates ailments is ‘Neem.’ The five parts of Neem (the margosa tree) – leaves, flowers, fruit, bark and root i.e. the whole tree is teeming with medicinal properties . Its shade is health giving , so it is beneficial to take rest under the shade and breathe in the healthy air of this tree. Neem is cool, bitter and pungent . It soothes Kapha and Pitta humours but augments the Vata humour.
Leaves of Neem tree: These are the best germicides and also help in strengthening the immunity of human body. Chewing of its tender leaves helps in purifying the blood. The juice of neem leaves should be put in the eyes(one

When it is mixed with a pinch of black cumin powder, peppermint and rock salt , it gives good relief in acidity . this drink also imparts strength and coolness to heart. In hypertension, this juice is beneficial therapy if taken early morning for one week. Thereafter a gap of two days should be given and the same may be repeated for desirable results. Intake of 2gm. Taking Neem leaves juice mixed with Rasayana churna gives relief in the problem of wet dreams.
Its juice mixed with honey provides relief in jaundice, pallor and haemorrhages (blood ooze out from the nose, rectum, urethra and vagina). Extract of Neem leaves is extremely beneficial in venereal diseases like Syphilis and Gonorrhoea.

It acts as an antidote in case of any venom intake. Give the extract of Neem leaves to the patient and make him vomit out and empty the stomach. It cleanses the skin and acts as a blood purifier. So the intake of Neem leaves juice or the boiled extract of all the five parts of this tree gives relief in skin problems like ring worm, scabies and itching etc. External application of Neem oil is also suggested in skin disorders. Neem leaves ground in curds should be applied to ring worms for everlasting relief.
· Neem leaves juice Mixed with half a teaspoonful of turmeric powder gives relief in problem of Polyuria.
· Neem is a very good cooling agent. External application of ground Neem leaves acts as a coolant in any kind of burning sensation born of fever or burning in limbs.
· Intake of Neem leaves juice mixed in honey helps in worming the body.

· In small – pox , rub Neem leaves juice on the body of the patient. For better results, give him lukewarm juice to during thrice a day. Spread Neem leaves on the patient’s bed. Also hang a few twigs on the door as well as windows of the room. The quantity prescribed in all cases: 20 -30ml.

The inner bark of Neem: Taking 3gm of ground bark mixed with 5gm old gur is beneficial in Piles. It also relieves the body fever. Neem bark paste should be applied on the head for relief in (nosebleed) epitaxis.

NEEM FLOWERS : Taking 20ml. juice of fresh Neem flowers gives relief in acne and boils problem. Juice of fresh Neem flowers should be taken every morning for about one fortnight in the montsh of Chaitra (from 9th March to 6th April' 2012). During these days take saltless diet and avoid taking sour, pungent and fried food. This theraphy helps in eradicating all kinds of skin related problems and also enhances immunity in the body.

Fruit of the Neem tree: In the months of April and May, when the Neem tree bears fresh fruits, make a practice to eat 10 pieces of ripe Neem fruit every day. It cleanses the blood and improves appetite. Ground fruit used as sauce is tasty and vitalizing. It helps in eradicating piles.

Twig of Neem tree : Take a small twig, about 8-10 inches long and in thickness equal to a finger and by chewing it with your teeth, making it into a brush (datum). Apart from cleaning teeth, it also imparts them shine and strength. It also prevents the gums from any disease and the teeth from any cavity. This therapy also controls the rapid growth of oral cancer. It destroys mouth worms.

External therapy: Any wound when washed with boiled extract of Neem bark, gets healed very fast. Application of Neem oil in chronic cuts and wounds, diabetic ulcers, skin deiseases, burning of soles etc. is extremely beneficial. Rinse the mouth with the boiled extract of all the five parts of Neem tree in case of decayed teeth. Not only this, the smoke emitting out of burning dried leaves and twigs helps in cleansing and purifying the environment.




कहीं चपेट में न ले लें बरसाती बीमारियां




कहीं चपेट में न ले लें बरसाती बीमारियां

बरसात आते ही क्लीनिक में अपच, फूड पॉयजनिंग, हैजा, पेचिस के मामले आने लगते हैं। ऐसे में साफ-सफाई, भोजन और कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी हो जाता है,
झुलसाती गर्मी के बाद आई रिमझिम बौछारों से तन-मन सब भीग कर उल्लसित हो उठता है। लेकिन इस मौसम का आनंद लेने में यह न भूल जाएं कि पेट की असंख्य बीमारियों को भी यही मौसम लेकर आता है। यदि थोडी-सी सावधानी और सजगता बरतें तो आप कई घातक बीमारियों से दूर रह सकते हैं।

अपच

यह इस मौसम की सबसे सामान्य बीमारी है और बहुत से रोगों की जनक भी है। इस मौसम में हमारा पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है। जल्दी खाने और ज्यादा खाने से दिक्कत पैदा होती है। इसके अलावा कार्बोनेटेड पेय पीने, ज्यादा तला-भुना खाने, फाइबर की अधिकता वाला भोजन करने से ये समस्या होती है। ज्यादा कैफीन, शराब, धूम्रपान के साथ चिंता व अवसाद भी बहुत तेजी से इस समस्या को बढ़ाता है। यह बढ़ जाए तो गैस्ट्राइटिस, अल्सर, गॉल ब्लेडर में स्टोन आदि समस्या भी पैदा कर सकती है।

लक्षण

पेट में बेचैनी, गले व छाती में जलन, नॉशिया महसूस होना और बार-बार मोशन होना आदि इनके सामान्य लक्षण हैं। दरअसल, पेट में बनने वाले एसिड ज्यादा होने पर उल्टे रास्ते फूड पाइप में आ जाते हैं, जिससे बेचैनी होने लगती है।

उपचार

घरेलू उपचार के लिए अदरक का जूस नींबू के रस के साथ और काला नमक व अजवाइन का सेवन फायदेमंद होता है। अच्छे पाचन के लिए कुछ दवाएं भी बाजार में उपलब्ध हैं। खाना समय पर खाएं, जो ताजा हो व अच्छी तरह से पका हो।

फूड पॉयजनिंग

गलत खान-पान से फूड पॉयजनिंग की तकलीफ होना इस मौसम की आम समस्या है। यह उस खाने को खाने से होता है, जिसमें इकोली, सलमोनेला व स्टेफिलोकॉक जैसे बैक्टीरिया मौजूद हों। खराब खाना खाने के छह घंटे के अंदर लक्षण दिखने लगते हैं।

लक्षण

पेट में दर्द, उल्टी, चक्कर, सिर दर्द, ठंड लगना, डायरिया आदि इसके मुख्य लक्षण हैं। इस स्थिति में कमजोरी महसूस होती है। उपचार
डायरिया अपने आप ही ठीक हो जाता है, जब शरीर से टॉक्सिन बाहर निकल जाते हैं, लेकिन डिहाइड्रेशन के लिए डॉक्टरी सलाह और मेडिकेशन जरूरी है। इसके लिए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। इलाज आरंभ होने के 12 से 48 घंटे के बीच आराम आ जाएगा। पानी की कमी न हो इसके लिए तरल पदार्थों का सेवन बढ़ाएं। बार-बार हाथ साफ करें और खाने के बर्तनों की भी सफाई का ध्यान रखें।

हैजा

यह एक प्रकार का संक्रामक आंत्रशोथ है, जो वाइब्रियो कॉलेरी नामक जीवाणु द्वारा टॉक्सिन उत्पन्न करने के कारण होता है। आम तौर पर यह मक्खी, मच्छरों और कॉक्रोच से फैलता है। यह रोग इस जीवाणु से ग्रसित भोजन या पानी ग्रहण करने से होता है। इसके बैक्टीरिया पानी में दो सप्ताह और बर्फ में चार से छह सप्ताह तक जीवित रहते हैं। ये ऐसे कीटाणु हैं, जो हमारे घर में ही मौजूद रहते हैं।

 लक्षण

पेट में मरोड़, अनियंत्रित दस्त, रक्तचाप का गिरना व नब्ज का संयमित न रहना मुख्य लक्षण हैं।

सावधानी

अपने घर को साफ रखें, घर में मक्खी-मच्छर और कॉक्रोच न रह पाएं, इस बात का खास ख्याल रखें। कच्ची सब्जियों को साफ पानी से धोएं, जिससे बैक्टीरिया नष्ट हो जाएं।

 उपचार

पूरा आराम करें, तरल पदार्थों का सेवन बढ़ाएं, जिससे शरीर में पानी की कमी न हो पाए। नारंगी जूस और नमक चीनी का घोल या इलेक्ट्रॉल लें। डॉक्टरी सलाह पर अमल करें। खाने का रखें ध्यान
बारिश के मौसम में हमारा पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है, इसलिए अपने खाने का ध्यान रखें। रेड मीट और रूट वेजिटेबल्स कम खाएं। हरी पत्तेदार सब्जियों जैसे पालक और पत्ता गोभी में भी छोटे कीड़े और उनके अंडे होते हैं। इन्हें खाना भी है तो गुनगुने पानी से धोकर खाएं। बादाम, पनीर, दालें, अंकुरित अनाज, बेसन आदि में भरपूर मिनरल्स व प्रोटीन हैं। ताजा नींबू और पुदीना नियमित लें।

सावधानी है जरूरी


ध्यान रहे कि 90 प्रतिशत बीमारियां पेट से जुड़ी होती हैं और इनमें से ज्यादातर बीमारियों की वजह होती है दूषित पानी का सेवन। इस मौसम में पीने का पानी साफ मिले यह जरूरी नहीं, इसलिए पानी को पंद्रह मिनट उबाल कर ठंडा कर छान कर पीना चाहिए। इस मशक्कत से बचना चाहते हैं तो वॉटर प्यूरीफायर का इंतजाम करें। हर बार कुछ खाने से पहले हाथ साबुन से धोएं। याद रहे कि टैक्सी, बस, ऑटो, वॉशरूम के अलावा खांसने और छींकने से भी बहुत से जर्म्स आपके हाथों से पेट में पहुंचते हैं। हर जगह और हर समय साबुन और पानी हो यह जरूरी नहीं। इसलिए एक बोतल पानी घर से लेकर चलें।