Sunday, 14 July 2013

हस्त-चिकित्सा

हस्त-चिकित्सा




हस्त-चिकित्सा शरीर के किसी भी अंग की पीड़ा का चमत्कारिक ढंग से निवारण करनेवाली, स्वास्थ्य एवं सौन्दर्यवर्धक चिकित्सा पद्धति है

मानसिक पवित्रता और एकाग्रता के साथ मन में निम्नलिखित वेदमंत्र का पाठ करते हुए दोनों हथेलियों को परस्पर रगड़कर गरम करें, तत्पश्चात् उनसे पाँच मिनट तक पीड़ित अंग का बार बार सेंक करें और उसके बाद नेत्र बन्द करके कुछ मिनट तक सो जाइये इससे गठिया, सिरदर्द तथा अन्य सब प्रकार के दर्द दूर होते हैं मंत्र इस प्रकार है:

अयं मे हस्तो भगवानयं मे भगवत्तर:।
अयं मे विश्वभेषजोsयं शिवाभिमर्शनम्॥

मेरी प्रत्येक हथेली भगवान (ऐश्वर्यशाली) है, अच्छा असर करनेवाली है, अधिकाधिक ऐश्वर्यशाली और अत्यंत बरकतवाली है मेरे हाथ में विश्व के सभी रोगों की समस्त औषधियाँ हैं और मेरे हाथ का स्पर्श कल्याणकारी, सर्व रोगनिवारक तथा सर्व सौन्दर्यसंपादक है |”
आपकी मानसिक पवित्रता तथा एकाग्रता जितनी अधिक होगी, उसी अनुपात में आप इस मंत्र द्वारा हस्त-चिकित्सा में सफल होते चले जायेंगे अपनी हथेलियों के इस प्रकार के पवित्र प्रयोग से आप केवल अपने, अपितु अन्य लोगों के रोग भी दूर कर सकते हैं




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