Thursday, 11 July 2013

पेट-पाचन खराब हो तो..



पेट-पाचन खराब हो तो..

अगर पेट-पाचन हमेशा ख़राब रहता है तो दाया हाथ नाभि पर और बाया हाथ इसके ऊपर रख कर गीता के १५ वे अध्याय का १४ वें श्लोक का सात बार रोज श्रद्धा से पाठ करो |

श्लोक – अहं वैश्वानरो भूत्वां प्राणिनां देहमाश्रितः | प्राणापानसमायुक्त: पचाम्यन्नं चतुर्विधम ||

उसका अर्थ ये है – भगवान कहते है कि मैं सब के अंदर वैश्वानर रूप से बैठा हूँ , जठराग्नि के रूप में | खाया हुआ अन्न मैं ही पचाता हूँ |

तो उन लोगों को प्रार्थना करनी चाहिये कि हे भगवान आप ही ने कहा है परन्तु मेरा पेट और पाचन क्यूँ खराब हो गया इसको तू ही ठीक कर दे |


Cure for improper digestion



If someone is suffering from poor digestion, then one should keep his right hand on the navel and left hand on top of it. and then recite the 14th shloka of 15 chapter for seven times daily with devotion.

Shloka: AHAM VAISHVANARO BHUTVA PRANINAM DEHAMASHIRATAH |
PRANAPANASAMAYUKTAH PACHAMYANAA CHATURVIDHAM ||


Meaning: I reside among all in the form of Vaishvanara, the internal digestive fire.I only digest the ingested food.

So, those who are suffering should pray to Lord saying that you only reside in me and can cure me by your will. 



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