Thursday, 18 July 2013

रोगों से रक्षा और रोग निवारण हेतु गोमूत्र पान

रोगों से रक्षा और रोग निवारण हेतु गोमूत्र पान  




शरीर की पुष्टि के साथ शुद्धि भी आवश्यक है | गोमूत्र शरीर के सूक्ष्म-अतिसूक्ष्म स्त्रोतों में स्थित विकृत दोष व मल को मल–मुत्रादि के द्वारा बाहर निकाल देता है | इसमें स्थित कार्बोलिक एसिड कीटाणुओं व हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करता है | इससे रोगों का समूल उच्चाटन करने में सहायता मिलती है | गोमूत्र में निहित स्वर्णक्षार रसायन का कार्य करते है | अत: गोमूत्र के द्वारा शरीर की शुद्धि व पुष्टि दोनों कार्य पूर्ण होते है


सेवन विधि : प्रात: २५ से ४० मि.ली. (बच्चों को १०–१५ मि.ली.) गोमूत्र कपडे से सात बार छानकर पियें | इसके बाद २–३ घंटे तक कुछ न लें | ताम्रवर्णी गाय अथवा बछड़ी का मूत्र सर्वोत्तम माना गया है


विशेष : सुबह गोमूत्र में १०–१५ मि.ली. गिलोय का रस (अथवा २–३ ग्राम चूर्ण) मिलाकर पीना उत्कृष्ट रसायन है


ताजा गोमूत्र न मिलने पर गोझरण अर्क का प्रयोग करें | १०–१२ मि.ली. (बच्चों को ५–१० मि.ली.) गोझरण अर्क में पानी मिलाकर लें | (गोझरण अर्क सभी संत श्री आशारामजी आश्रमों व समितियों के सेवाकेन्द्रों पर उपलब्ध है )

Special Cow urine for rainy season


Along with enhancing body strength, it is also essential to purify the body. Cow's urine can purify impurities even in the minutest nerves and extracts them out through urine and stool. It has carbolic acid which can destroy bacteria and harmful organisms in these impurities. Cow's urine performs as a golden medicine. So, cow's urine strengthens and purifies the body.


Dosage: In the morning, take 25-40 ml (10-15 ml for children) of cow's urine and sieve it properly seven times using a cloth. After consuming it, do not take anything else for 2-3 hours. Urine from bronze colored cow or calf is considered to be most beneficial.


Special: In the morning, drinking cow's urine mixed with 10-15 ml of giloy extract or (2-3 grams of its powder) is considered as best medicine.


If one cannot avail fresh cow's urine, one may also use Gojharan ark. Take 10-12 ml (5-10 ml for children) of ark mixed in water.
(Gojharan ark is available in all Sant Shri Ashramji ashrams and seva centres of samitis)




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