Wednesday, 14 August 2013

सफेद दाग, मस्से और तिल... जानें इन सबके राज और इलाज

सफेद दाग, मस्से और तिल... जानें इन सबके राज और इलाज




शरीर की त्वचा में कई प्रकार के चर्म रोग या स्किन संबंधी समस्याएं हो जाजी हैं। इस तरह की समस्याएं अच्छे भले व्यक्ति की खूबसूरती को बिगाड़ कर रख देती हैं। इन त्वचा संबंधी समस्याओं या बीमारियों के बारे में सही और वैज्ञानिक जानकारी होना, खुद हमारे और और हमारे अपनों के लिये बेहद जरूरी होता है। आइये जानते हैं कि त्वचा की प्राकृतिक सुन्दरता को बिगाडऩे वाली प्रमुख समस्याएं कौनसी हैं और उनका समाधान कैसे हो सकता है...

सफेद दाग

यह दूधिया सफेद रंग का दाग होता है । इसे ल्यूकोडर्म कहते है इसका इलाज काफी लंबा चलता है । आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा के प्रयोगों से भी इससे छुटकारा पाया जा सकता है।

सफ़ेद दाग हो तो कार्तिक मास के हर रविवार को नमक मिर्च बिना का भोजन और सूर्य भगवान की पूजा तिल के तेल का दीपक दिखा के करे, लोटे में गुलाब की पंखुड़ियाँ,शक्कर, चावल, तिल आदि डालकर अर्घ्य दे |

होमियोपेथी दवा अपने आश्रम में मिलती है, वो लें तो सफेद दाग बीमारी जल्दी दूर होती है और शामा तुलसी
(थोड़े काले-काले पत्ते होते है शामा तुलसी के) वो पत्ते जहाँ सफेद दाग है वहाँ रगड दिया करें, उसका रस लगा
दिया करें |

सोरिएसिस

सामान्य भाषा में इसे अपरस कहते है इसमें शरीर के किसी भी भाग में चमडी छिलके के रूप में निकलती है आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा के प्रयोगों से भी इससे छुटकारा पाया जा सकता है।

मस्से

ये 8 से 10 प्रकार के होते हैं।

त्वचा के मस्से का उपचार

पहला प्रयोगः बंगला, मलबारी, कपूरी अथवा नागरबेल के पत्ते के डंठल का रस मस्से पर लगाने से मस्से झड जाते हैं। यदि तब भी न झडें तो पान में खाने का चूना मिलाकर घिसें।

दूसरा प्रयोगः थूहर का दूध या कार्बोलिक एसिड सावधानी पूर्वक लगाने से मसे निकल जाते हैं।

त्वचा के लाल छालेः काले जीरे को गोमूत्र में पीसकर शरीर पर लगाकर नहाने से अथवा चन्दन तेल, तुवरक तेल एवं बावची का तेल मिलाकर लगाने से लाभ होता है।

तिल

यह मस्से से अलग होते है यह काले रंग के छोटे-छोटे दाने के समान होते है। इसका इलाज रेडियोंकान्ट्री व कास्मेटिक सर्जरी द्वारा किया जाता है ।

सनटैनिंग

कुछ लोगों के चेहर व शरीर के खुले भाग में धूप में धूमने के कारण शरीर का वह भाग काला हो जाता है । यह दवाइयों के द्वारा ठीक किया जा सकता है। आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा के प्रयोगों से भी इससे छुटकारा पाया जा सकता है।

अच्युताय एलोवेरा जेल त्वचा को मुलायम व कोमल बनाती है! सूर्य की तेज किरणों , धुल. केमिकल्स आदि से त्वचा पर होनेवाले प्रभाव से रक्षा करता है! कील , मुँहासे, काले दाग, झुर्रियाँ आदि को दूर करता है!


एलर्जी

कई बार कुछ हानिकारक सौन्दर्य प्रशाधनों, आर्टिफि शियल गहनों या कुछ हानिकारग मिलावटी वस्तु खाने से एलर्जी हो जाती है। कुछ लोगों में एलर्जी के कारण शरीर में लाल-लाल चकते निकल जाते हैं। जिन्हे अर्टीकेरिया कहते है। आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा के प्रयोगों से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।



एक्जिमा

यह भी चमडी में होने वाली एक प्रकार की एलर्जी है। इसमें चमडी मोटी हो जती है व उसमें खुजली होती है। आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा के प्रयोगों से भी इससे छुटकारा पाया जा सकता है।
खुजली (Eczema)का उपचार

पहला प्रयोगः आश्रम में उपलब्ध लालबूटी में करंज या नीम का तेल मिलाकर मालिश करने से खुजली में लाभ होता है।

छीला

यह शरीर में होने वाली विशेष प्रकार का फंगल इंफेकशन है जिसमें गर्दन, चेहरे व पीठ में हल्के पीले रंग के दाग हो जाते है। आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा के प्रयोगों से भी इससे छुटकारा पाया जा सकता है।

पसीने में बदबू

कुछ व्यक्तियों के पसीने में काफी तेज बदबू होती है। पेट साफ  नहीं होने, लहसुन, प्याज के ज्यादा सेवन से भी पसीने में बदबू होने की समस्या हो सकती है । बगल के बाल साफ  रखें, शारीरिक सफाई का बहुत ध्यान रखें, नियमित व्यायाम करे, पानी ज्यादा पीयें।




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