Friday, 9 August 2013

घर में बनाएं खुजली नाशक तेल

घर में बनाएं खुजली नाशक तेल



त्वचा पर खुजली चलने, दाद हो जाने, फोड़े-फुंसी हो जाने पर खुजा-खुजाकर हाल बेहाल हो जाता है और लोगों के सामने शर्म भी आती है।

यदि आप कोई क्रीम या दवा लगाना न चाहें या लगाने पर भी आराम न हो तो घर पर ही यह चर्म रोगनाशक तेल बनाकर लगाएं, इससे यह व्याधियां दूर हो जाती हैं।


तेल बनाने की विधि : नीम की छाल, चिरायता, हल्दी, लाल चन्दन, हरड़, बहेड़ा, आंवला और अड़ूसे के पत्ते, सब समान मात्रा में। तिल्ली का तेल आवश्यक मात्रा में। सब आठों द्रव्यों को 5-6 घंटे तक पानी में भिगोकर निकाल लें और पीसकर कल्क बना लें।

पीठी से चार गुनी मात्रा में तिल का तेल और तेल से चार गुनी मात्रा में पानी लेकर मिलाकर एक बड़े बरतन में डाल दें। इसे मंदी आंच पर इतनी देर तक उबालें कि पानी जल जाए सिर्फ तेल बचे। इस तेल को शीशी में भरकर रख लें।

जहां भी खुजली चलती हो, दाद हो वहां या पूरे शरीर पर इस तेल की मलिश करें। यह तेल चमत्कारी प्रभाव करता है। लाभ होने तक यह मालिश जारी रखें, मालिश स्नान से पहले या सोते समय करें और चमत्कार देखें।



* ''अच्युताय मलहम(Achyutaya Malham)'' पैरों की कटी-फटी एड़ियों एवं दाद,खाज  खुज़ली के लिए अत्यधिक लाभप्रद है ।

* ''अच्युताय नीम तेल'' दाद, खाज, खुजली तथा चर्म रोग पर लगायें ,कुष्ठ- रोग, विषमज्वर, फिलपाँव, सड़े घाव तथा आमवात में 5 से 10 बूंद प्रयोग करे।


* ''अच्युताय नीम अर्क(Achyutaya Neem Ark)'' (रक्त शुद्धिकर ,पित्तशामक) दाद, खाज, खुजली, कील - मुँहासे, रक्तप्रदर, गर्भाशय के रोग, पुराने त्वचा विकारों व आँखों के सर्व विकारों मे गुणकारी ।  दाह व पित्तशामक, पीलिया, पांडुरोग, रक्तपित्त, उलटी व यकृत के सब रोगों में लाभदायी । बाल झडना भी कम होता है ।


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