प्राकृतिक चिकित्सा

प्रत्येक मनुष्य के जीवन में इन तीन बातों की अत्यधिक आवश्यकता होती है – स्वस्थ जीवन, सुखी जीवन तथा सम्मानित जीवन। सुख का आधार स्वास्थ्य है तथा सुखी जीवन ही सम्मान के योग्य है।

आयुर्वेद का अनुपम उपहार

अच्युताय हरिओम उत्पाद

स्वास्थ्य का सच्चा मार्ग

स्वास्थ्य का मूल आधार संयम है।

सर्दियों के लिए विशेष

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Achyutaya HariOm Panchamrit Ras :अच्युताय हरिओम पंचामृत रस : स्वास्थय व ऊर्जा प्रदायक, पाचक, व रोगनाशक अदभुत योग

Achyutaya HariOm Santkripa Surma : अच्युताय हरिओम संतकृपा सुरमा - आँखों को सुरक्षित, निरोगी, तेजस्वी बनाने की क्षमता रखने वाला अदभुत योग

Wednesday, 6 December 2017

अच्युताय हरिओम संतकृपा सुरमा



★   पैत्तिक विकारों में शीतवीर्य द्रव्यों का एंव कफज विकारों में उष्णवीर्य वाले लेखन द्रव्यों का प्रयोग करना होता है । पंरतु गुरूकृपा से बना ये संतकृपा सूरमा अपने आप में अद्भुत है जो एक साथ पित्त कफ के दोषों का निवारण कर आँखों के विविध रोगों को दूर करके आँखों की दृष्टि को निर्मल सुरक्षित व पुष्ट करता है |

★   इस आधुनिक युग के विविध हानिकारक साधनों जैसे कि कम्प्यूटर, टेलीविजन, मोबाइल, लेपटॉप, एल.ई.डी., चमकदार रोशनी, आँख के श्रृंगार प्रसाधन साथ ही दैनिक आहार-विहार जिसमें फास्ट-फूड, जंग-फूड, बजारू मिर्च मसालेदार भोजन, रात्रि जागरण, चिंता, शोक, क्लेश, क्रोध के कारण आँखो को क्षति होती है |

★   इस रफ्तार से भागते तेज युग में त्वरित लाभ हो आँखों का तेज बरकरार रहे इसी ध्येय से जन समाज की पीडा को स्वयं की पीडा अनुभव करने वाले परम दयालु बापूजी ने इस सूरमे में ऐसी पुष्टिकारक औषधि डलवाई है जिससे लोगों की पीडा दूर हो ।

सुरमा की प्रमुक औषधियाँ व उनके फायदे :

मोती पिष्टी :- वातवाहिनी, रक्तवाहिनी, मासँपेशियो को सबल बनाते हुए नेत्र कोे हानि करने वाले दोषों को हर लेता है ।
प्रवाल पिष्टी :- आँख में बढी तीक्ष्णता, अम्लता, उष्णता को हर कर स्थानीय नाडीयो को बल देता है ।
शुद्ध तुतीया :- कई दिनों तक शास्त्रानुसार परिशुद्ध किया ये दृव्य, मासँ वृद्धि बेल दूषित बाहरी संक्रमण को अपने प्रभावी गुणों से नष्ट करता हैं ।
काली मिर्च :- आँखों को खराब करने वाले पित्त कफ का नाश करता है ।
चमेली की कली :- अपने तिक्त कषाय गुण से दोषों का हरण ।
नीम की कोपल :- अपने विषाणुहर व तिक्त गुण से आँखों का इन्फेकशन व दुषित कफ पित्त का शमन करती  है इसी प्रकार से अन्य औषधि भी डाली गई है |

इस प्रकार संतकृपा सुरमा सचमुच में नाम के अनुसार अपने में आँखों को सुरक्षित निरोगी तेजस्वी बनाने की क्षमता रखता है ।

पथ्य :- ऑवला का किसी भी रुप में सेवन, काली किशमीश, गाय का दूध, घृत, मूंग के छिलके वाली दाल ।
अपथ्य :- बाजारू जंग, फास्ट-फूड, दही ।
पालनीय :- रोजाना प्रातः मुखधावन के बाद मुहँ मे ठंडा पानी का कुल्ला भरकर छोटी कटोरी (एूश ुरीहशी) में भी ठंडा पानी लेकर आँख को उसमें डुबाकर आँख पटपटाना, घुमाना ये प्रकिया दोनों आँखों में दो बार करनी है हर बार मुख का पानी भी बदलना यह विशेष लाभ के लिए है ।

उपयोग-विधि : सुरमे का उपयोग करने से पहले सलाई को पूरी तरह स्वच्छ व सूखे कप‹डे से साफ करें । सुरमे का कम-से-कम मात्रा में उपयोग करें । रात को सोते समय इसका एक बार उपयोग करें ।

सावधानियाँ : ११ साल से कम उम्र के बच्चों को सुरमा न लगायें । किसी भी प्रकार के आँखों के ऑपरेशन या लेंस के उपयोग के बाद सुरमे का प्रयोग न करें । इसे साफ और सूखी जगह पर ही रखें ।

नेत्र दीर्घकाल स्वस्थ व सुंदर चमकें तुम्हारे ।

प्राप्ति-स्थान : सभी संत श्री आशारामजी आश्रमों( Sant Shri Asaram Bapu Ji  Ashram ) व श्री योग वेदांत सेवा समितियों के सेवाकेंद्र से इसे प्राप्त किया जा सकता है |

Thursday, 20 July 2017

शहद का जमना एक कुदरती प्रक्रिया - चरकसंहिता



हजारो वर्षपूर्व रचित चरकसंहिता मे भी शहद जमने की बात का प्रमाण दिया गया है ।

चरकसंहितामे , 27  अध्याय "अन्नपानविधी (श्लोक 242 ) " मे मधुशर्करा का स्पष्ट वर्णन है ।

"रुक्षा वम्यतिसारघ्नि च्छेदनी मधुशर्करा । तृष्णासृक् पित्तदाहेषु प्रशस्ता: सर्वशर्करा: ।। "

अनुवाद : शहद से निर्मित चीनी रुक्ष, उल्टी को रोकनेवाली, दस्तको रोकनेवाली, कफ को तोड़नेवाली, तृषा का समन करनेवाली, रक्तपित्त ओर दाह (जलन)को मिटानेवाली है ।

वर्तमान समय मे विदेशी बाजारों मे honey sugar (शहद से निर्मित चीनी ) के नामसे बेची जानेवाली सबसे महंगी चीनी, चरकसंहिता मे बताई गई मधुशर्करा ही है ।

          भारतीय समाज मे यह मान्यता ज्यादा देखने को मिलती है के शहदका जमना उसमे मिलावट की निशानी है । लेकिन यह पूर्णतः गहत धारणा है ।

           शहद का जमना एक कुदरती प्रक्रिया है । शुद्ध शहद भी जाम ( crystallized ) हो सकता है । शहद का जमना इस बात पर निर्भर करता है की शहद को स्त्रोत क्या है ? मतलब कोनसे फूलो के रससे मधुमक्खीओने शहद का निर्माण किया है । शहद के अंदर प्राकृतिक रूप मे ग्लूकोज़ ओर फ्रुक्टोज जेसी शर्कराए होती है । शहद का जमना उसके अंदर रहे हुए ग्लूकोस की मात्रा पर निर्भर करता है । जिन फूलोके रस मे प्राकृतिक रूप से ग्लूकोज़ की मात्रा अधिक होती है, उनके रस ( nectar)  से अगर मधुमक्खी शहद का निर्माण करती है तो उस शहदमे जमनेका गुणधर्म ज्यादा रहेगा । प्राकृतिक रूप से  तैलीबीज (oil seeds) वाली वनस्पति के फूलो से अगर मधुमक्खी शहद बनती है तो उसके जमनेका गुण अधिक होता है । इसीलिए मधुमक्खी पालन मे बक्से ( honey bee hives )को राइ, सूर्यमुखी, तिल, सोयाबीन जेसे खेतो के बीच रखते है तो उनसे मिला शहद जमता है । उसे जाम हनी या क्रीम हनी के नाम से निर्यात किया जाता है, जो संपूर्णतः जमा हुआ होता है ।

                ज्यादातर लोगो मे जमे हुए शहद को लेकर गलत धारणाये होती है । इस कारण से भारत मे हरकही raw honey के स्थान पर processed या heated शहद ही बिकता है, जो सामान्य रूपसे  जमता नही है । शहद को एकबार उबाल देने से उसमे रहा जमने का (crystalised ) होने का स्वाभाविक गुण नष्ट हो जाता है । लेकिन उसके साथ ही शहदमे रहे औषधीय गुण भी नष्ट हो जाते है ।  वास्तविकता यह हे की 45° c तापमान पर भी
शहद में रहे औषधीय तत्व जेसे की antioxidant, enzymes, vitamins, many anti aging properties, acids etc, नष्ट हो जाते हे । यह औषधीय तत्व ही शारीर को आरोग्यप्रदान करते हे और कही रोगों से लड़ने की शक्ति देते हे । इसलिए शहद को गर्मी से दूर रखना चाहिए । जब की ज्यादातर कंपनीया शहद को प्रोसेस्ड या पेस्च्युराइस ( हीटिंग और कूलिंग प्रोसेस ) करके बेचती हे, और ऐसा शहद शुगर सिरप से बढ़कर कुछ नहीं हे । इसीलिए ज्यादातर आयुर्वेद चिकित्सक "Raw honey" का उपयोग करने की सलाह देते हे ।
   
           शुद्ध शहद का जमना एक कुदरती प्रक्रिया है । वास्तव मे शहद के औषधीय गुण घन अवस्था (crystallized form) मे प्रवाही अवस्थासे  ज्यादा सुरक्षित होते है । इसलिए जमे हुए शहद का उसी अवस्था मे उपयोग करे ।






प्राप्ति-स्थान : सभी संत श्री आशारामजी आश्रमों व श्री योग वेदांत सेवा समितियों के सेवाकेंद्र से इसे प्राप्त किया जा सकता है |